Karwachauth

लाल रंग का जोड़ा पहने

दुल्हन सी सजी है
गहरे प्यार की रंग लाई
मेहंदी यूं रची है।
 
मेहंदी की खुशबू हो
या हो सरगी का प्यार
हर रूप में खिल उठे
जो करे वो सोलह श्रृंगार।
 
चूड़ियों की खनक है
और पायल की झंकार है
मांग भरे सिंदूर से 
आज फिर उनका दीदार है।
 
करवा की थाली में
जलता दिया विश्वास का
लंबी उम्र की दुआ मांगे
यह रिश्ता है एहसास का।
 
ऐ चांद! तू भी सुन ज़रा
हर सुहागन की पुकार है
व्रत किया जलपान का
आज तेरा इंतज़ार है। 
 
श्वेता गुप्ता
 
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