यादें
ज़िन्दगी का सफर होता है 
यादों की किताब 
जो बनता नहीं यूहीं 
बिना अपनों के मिले जनाब।
 
दिल की दीवारों पे अक्सर 
लिखते है हम
गुजरी हुई यादें
भुलाए हुए गम
 
मजबूत से बने अब
छुपाते है अपनी खाहिशें
कहां खो गए वो दिन
हम भी किया करते थे फरमाइशें
 
हंसाती है रुलाती है
यह यादें हमें बनती है
बिन बोले बिन अल्फाजो के
कई बातें बयान कर जाती है।
 
हर दिन नया 
हर तारीख़ पुरानी
हर पुरानी कहानी 
की एक निशानी
 
आज यह पल हैं
कल बस यादें होंगी
जब ये पल ना होंगे
तब सिर्फ़ बातें होंगी
 
जो पलटोगे ज़िन्दगी
के पन्नों को तुम
कुछ पे गम के आंसू
और कुछ पे मुस्कुराहटें होंगी।
 
जो यादें ना हो 
तो बेरंग है जीवन
जो अपने ना हो 
तो अकेला हो मन।
 
यह सफर कुछ थम सा गया है
इस साल यु सिमट गया 
अपना दौर कभी ना जाएगा
वो वक़्त दोबारा आएगा।
 
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8 thoughts on “यादें

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